Saturday, December 4, 2010

तुम और तम...


नींद मेरी आंखों से कोसों दूर रहती है
बोझिल होती हैं पलकें मगर आराम नहीं
ये रात मुझे जगये रख कर बहुत कुछ कहती है
मेरी तन्हाई और अपने अंधेरे को तौला करती है,
पता नहीं...
मेरे हिस्से में कडवाहट ज़्यादा या व ही ज़्यादा सहती है?

बांटा करती है अपने दामन में छिपा कर रखे काले किस्से
मेरी ये सहेली भी मेरी तरह उजालों से डरा करती है

कई बार इसकी बातों को नज़रांदाज़ कर जाती हूं
इसके किस्सों को दरकिनार कर आगे बढ जाती हूं
मगर दूसरे ही पल इस पछतावे से घिर जाती हूं...
कि ये तो अपनी कालिमा में मेरे आंसू छिपा लेती है,
है तिमिर से घिरी, उपेक्षित...फिर भी दोस्ती निभा लेती है...

फिर मुझमें ये स्वार्थ क्यूं जाना?
और तब से ही इसे सुनती हूं...हर रोज़...बिना नागा...

34 comments:

  1. अरे वाह !!
    अपनी आँखों में नींद आने दीजिये... पलकों थोडा आराम भी दें...
    रात से दोस्ती तोड़ कर सुरल की सुबह की लालिमा से निकटता बढाएं..अच्छा लगेगा...

    पहचान कौन चित्र पहेली ...

    ReplyDelete
  2. ... sundar rachanaa ... shaandaar !!!

    ReplyDelete
  3. बहुत ही सुंदर कविता. गहरे जज्बात भरे है. कभी कभी नींद भी अच्छी दोस्त नहीं रह जाती. ........

    ReplyDelete
  4. मन की भावनाओं से जूझती सी रचना ...

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छी रचना.....

    ReplyDelete
  6. बांटा करती है अपने दामन में छिपा कर रखे काले किस्से
    मेरी ये सहेली भी मेरी तरह उजालों से डरा करती है
    सुन्दर रचना।

    ReplyDelete
  7. मन के भावों का सहज प्रवाह्।

    ReplyDelete
  8. बहुत ही खूबसूरती से लिखे हैं मन के भाव

    ReplyDelete
  9. सहज-सरल भानाओं की सुंदर अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  10. सुन्दर एवं भावप्रवण अभिव्यक्ति. पलकों को जल्दी जल्दी झपकने दो, मार्तंड की सुनहली किरणों में लिपटे उजाला इंतजार कर रहा है .

    ReplyDelete
  11. आखिरी पंक्ति सहज और ठोस भाव से भरी है कि कविता को पूर्णता देती है. पूरी कविता बहुत सुंदर !

    ReplyDelete
  12. aakhiri lafz mujhe zara samajh nahin aaye...please forgive my stupidity ;)

    par baaqi nazm...wahh....kya khoob likha hai aapne, just tooo good, great reading u :)

    ReplyDelete
  13. @saanjh... aapko shayad naaga shabd ka matlab samajh nahi aaya..BINA NAGA ka matlab h WIDOUT GAP :)

    ReplyDelete
  14. नींद अक्सर जाग जाती है उस पल ... जब यादें घिर अति हैं ...
    गहरे भाव लिए रचना ..

    ReplyDelete
  15. nice one...
    meri aankhon se kosho door rahti hai nind...palke bojhil hoti hai par aaram nahi..nind bin sab sun..aaram kahan se...

    ReplyDelete
  16. बांटा करती है अपने दामन में छिपा कर रखे काले किस्से
    मेरी ये सहेली भी मेरी तरह उजालों से डरा करती है

    वाह मोनाली जी, बहुत खूब ...कितनी गहरी बात कही है आपने...बधाई स्वीकार करें।

    ReplyDelete
  17. भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति ...मगर दिल को छूने वाली ...शुक्रिया

    ReplyDelete
  18. मोनाली जी,
    नमस्ते!
    हम तो लोट-पोट हुए हँसते-हँसते!

    रात होती है सपने देखने के लिए.... रोने के लिए नहीं!
    कविता का शीर्षक:तुम और तम, बेहद सैड है.

    किसी तुम के साथ हम मिलाईये,
    'हम-तुम' बनके कोई रोमांटिक कविता सुनाईये!
    कभी किसी बात पर इतना मत पछ्ताईये!
    ज़िन्दगी के साथ कदम-ताल मिलाईये!
    घूँट-घूँट मुहब्बत का जाम पीजिये!
    ज़िंदगी को सीरियसली नहीं, सिंसीअर्ली लीजिये!

    आपका भी,
    आशीष

    ReplyDelete
  19. sabse pahle to sorry ki main bahut dino se aapke blog par aane ki soch raha hoon lekin nahi aa paay to pahle to main aapka follower ban gaya .. aaj soch , ki office jaane ke pahle aapke blog ko dekha jaaye .. sach kahun aapki saari kavitaye bahut acchi hai kuch na kuch kahti hai aur man me utar jaati hai /........dil ko choo leni wali abhivyakti ke liye aapko salaam .. saari kavitaye bahut bahut acchi hai ...

    meri dil se badhayi sweekar kijiye ..

    vijay
    poemsofvijay.blogspot.com
    09849746500

    ReplyDelete
  20. सुंदर रचना बेहतरीन कविता बहुत कुछ कहते शब्दों से परिपूर्ण है उम्दा पोस्ट ...............

    ReplyDelete
  21. ये दर्द कविता का है या कवि का....जो भी है मगर अब तो है यह सभी का....!!शब्द जब तक मन में होता है तभी तक अपना होता है....पन्ने पर उतरते ही उसका अर्थ बन जाता है सभी का.....है ना...मोनाली....!!

    ReplyDelete
  22. खूबसूरती से लिखे हैं मन के भाव ,बेहतरीन कविता
    ...

    ReplyDelete
  23. कुछ अलग सा ...दिल को छू गया !

    ReplyDelete
  24. अँधेरे का यूँ दर्द बांटना बहुत अच्छा लगा. अभिव्यक्ति भी बहुत अच्छी लगी.

    ReplyDelete
  25. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ....बढ़िया लगा आपका ब्लॉग....ग़ज़ल बहुत ही प्यारी है.........आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि साथ बना रहे......शुभकामनाये.....

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को को भी)

    http://jazbaattheemotions.blogspot.com/
    http://mirzagalibatribute.blogspot.com/
    http://khaleelzibran.blogspot.com/
    http://qalamkasipahi.blogspot.com/

    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

    ReplyDelete
  26. सुन्दर प्रस्तुति
    बहुत - बहुत शुभकामना

    ReplyDelete
  27. बांटा करती है अपने दामन में छिपा कर रखे काले किस्से
    मेरी ये सहेली भी मेरी तरह उजालों से डरा करती है

    so much pain inflicted...it's so deep and intense....nyways wonderful write....god bless!

    ReplyDelete
  28. दिलकश भावों से सजी
    बहुत सुन्दर रचना
    अच्छा लगा पढ़कर
    आभार


    क्रिएटिव मंच के नए कार्यक्रम 'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में आपका स्वागत है.
    यह आयोजन कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे से शुरू हो रहा है .
    आप का सहयोग हमारा उत्साह वर्धन करेगा.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  29. ......सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  30. बहोत ही सुन्दर रचना है !

    नए वर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनाये और इसके साथ है नए साल में मै आपका follower बन गया हूँ.

    ReplyDelete